Sunday, October 20, 2013

पूड़ी और सब्ज़ी का सपना

आज एक सपना देखा,
सपने में पूड़ी और सब्ज़ी देखी । 
पीले रंग की पूड़ी, उसके अंदर भरी हुई दाल भी पीली। 
सब्ज़ी का भी रंग पीला । 

पूड़ी से एक खुशबू आ रही थी । 
मैंने पूछ लिया, आजकल कैसी हो ?
उसने कहा, अच्छी हूँ,
आपके जूनियर्स आते रहते हैं । 

बगल में, शीशे के ग्लास में चाय रखी थी। 
उससे आती खुशबू ने, इस बात पर मुस्कुरा दिया।

चाय ने पुछा, वहाँ की चाय कैसी होती है ?
मैंने कहा, कुछ खास नहीं। 
तुम चाय हो, वो चाय जैसी होती हैं … 

फिर बातचीत में हमेशा की तरह मौसम ने कदम रखा ,
उनके ये पूछने पर मैंने कहा,
हवाएँ तो ठण्डी और शुष्क हैं !
पर उनमे ठहाको की बड़ी कमी है …  

बातें चलती रही, दिन चढ़ रहा था। 
मेरी नींद खुली तो, यहाँ रात गहरी थी। 
 

7 comments:

  1. बहुत उम्दा लिखे हो!

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  2. बहुत खूब कविराज

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  3. पर सच कहूँ तो मुझे भिंडी की सब्जी याद आ गयी, इंतेज़ार है मुझे उस दिन का का जब आप इस्पे कुछ लिखंगे.

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  4. तुम चाय हो, वो चाय जैसी होती हैं … is pankti ne choo liya..and the ending as always.. bahut achchi lagi :)

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