एक निर्मम प्यास हो तुम !
या जीवन की एकमात्र आस हो तुम ?
क्या हो तुम ?
मरुस्थल की मृगतृष्णा!
या हिमालय से निकली यमुना?
तुम तो !
रवि की उष्णता हो ।
और शशि की शीतलता भी !
तुममे ;
दश्त का सुकून है ।
और शहर का जुनून भी !
तुम कवि की
व्यथा भरी कथा हो ।
और हर्ष की पराकाष्ठा भी !
तुममेरी रचना हो।
और कोरी कल्पना भी !
या जीवन की एकमात्र आस हो तुम ?
एक प्याला पीयूष का हो !
या एक घूंट विष का हो ?क्या हो तुम ?
मरुस्थल की मृगतृष्णा!
या हिमालय से निकली यमुना?
तुम तो !
रवि की उष्णता हो ।
और शशि की शीतलता भी !
तुममे ;
दश्त का सुकून है ।
और शहर का जुनून भी !
तुम कवि की
व्यथा भरी कथा हो ।
और हर्ष की पराकाष्ठा भी !
तुममेरी रचना हो।
और कोरी कल्पना भी !