खड़े हो कर मंच प़र,दिखाया उसने एक सुन्दर सपना।
बात बात पर, बार बार वो,
कहता रहता हमे अपना!
कह रहा था, इस बार,
बदलेगा ये राष्ट्र हमारा।
सबको मिलेगी रोटी,
कोई न रहेगा, भूखा बेचारा।
हमे दर्द में देख,
उसका ह्रदय रो पड़ा।
उसकी आँखों से,
आँसू का एक कतरा गिर पड़ा।
कहता था , हम वो हर कुछ पाएंगे,
जो हमने पिचले वर्षो में नहीं पाया।
इतनी मीठी बातें सुनकर,
मधुमेह का डर सताया।
he he...ye mast hai sahi satire hai :)
ReplyDeletewell framed criticism of the gimmicks
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